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परिवर्तन दल के बंधे हाथ: आखिर कैसे हटेगा नगर से अवैध अतिक्रमण?

अयोध्या से रवि मौर्य 

अयोध्या। नगर निगम अयोध्या द्वारा सार्वजनिक स्थलों, सड़कों और गलियों से अवैध अतिक्रमण हटाने के उद्देश्य से गठित परिवर्तन दल खुद दबाव और बाधाओं से जूझता नजर आ रहा है। स्थानीय नेताओं के दबाव और अधिकारियों के अपेक्षित सहयोग के अभाव में कई जगहों पर कार्रवाई अधूरी रह गई, जिससे नगर में अतिक्रमण हटाने की मुहिम पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

नगर निगम ने सार्वजनिक स्थलों से अवैध कब्जे हटाने, सिंगल यूज प्लास्टिक के खिलाफ अभियान चलाने और शहर में व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगभग दो दर्जन पूर्व सैनिकों के साथ परिवर्तन दल का गठन किया था। लेकिन जमीनी स्तर पर यह दल कई मामलों में बेबस दिखाई दे रहा है।

बताया जाता है कि मई माह में रेलवे स्टेशन फव्वारा चौराहे से जेल रोड़ तक अतिक्रमण हटाने पहुंची टीम ने दुकानदारों को 22 मई तक स्वयं अतिक्रमण हटाने का समय दिया था। चेतावनी भी दी गई थी कि तय समय के बाद कठोर कार्रवाई होगी। लेकिन समयसीमा पूरी होने के बावजूद कार्रवाई नहीं हो सकी। आरोप है कि स्थानीय नेताओं के दबाव के चलते अभियान रोकना पड़ा।

इसी तरह डिफेंस कॉलोनी में मार्ग पर चबूतरा बनाकर मार्ग अवरुद्ध किए जाने की शिकायत पर परिवर्तन दल दो बार मौके पर पहुंचा। स्थानीय लोगों का कहना है कि रास्ता बाधित होने से आपात स्थिति में एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड की गाड़ियां नहीं निकल पाएंगी। इसके बावजूद अतिक्रमण नहीं हट सका।

बुधवार को नहरबाग स्थित अवध मॉल के सामने सड़क किनारे जनरेटर रखकर रास्ता घेरने की शिकायत पर भी टीम मौके पर पहुंची, लेकिन यहां भी कार्रवाई नहीं हो सकी। जनरेटर स्वामी द्वारा फिर से समय मांगे जाने के बाद मामला टल गया।

परिवर्तन दल प्रभारी बी.के. सिंह और अमरजीत सिंह ने बताया कि रेलवे स्टेशन फव्वारा चौराहे पर स्थानीय नेताओं के दबाव के कारण कार्रवाई नहीं हो पाई। डिफेंस कॉलोनी में उच्च अधिकारियों का पर्याप्त सहयोग नहीं मिला। वहीं नहरबाग में जनरेटर हटवाने की कार्रवाई भी समय मांगने के कारण स्थगित करनी पड़ी।

कुल मिलाकर परिवर्तन दल का कहना है कि उन्हें स्वतंत्र रूप से काम करने में बाधाएं आ रही हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जब नगर निगम द्वारा गठित टीम ही स्वतंत्र होकर कार्रवाई नहीं कर पा रही है, तो शहर से अवैध अतिक्रमण कैसे हटेगा?

नगर की जनता नगर निगम को टैक्स देती है और उसी से ऐसे अभियानों के लिए संसाधन जुटाए जाते हैं। लेकिन यदि जिम्मेदार टीम ही दबाव में काम करेगी, तो आम नागरिकों की समस्याओं का समाधान कैसे होगा—यह सवाल फिलहाल बना हुआ है।

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