Skip to main content

जिला शिक्षण एवं अनुश्रवण समिति व एमडीएम टॉस्क फ़ोर्स की बैठक सम्पन्न

विद्यालयों में आधारभूत सुविधाएं, स्मार्ट क्लास एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के दिए निर्देश

अयोध्या से रवि मौर्य 

अयोध्या। जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में जिला शिक्षण एवं अनुश्रवण समिति व एमडीएम टॉस्क फ़ोर्स की बैठक आयोजित की गई। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी  कृष्ण कुमार सिंह, अपर जिलाधिकारी प्रशासन अनिरुद्ध प्रताप सिंह एवं बेसिक शिक्षा अधिकारी  लालचंद सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

बैठक में जिलाधिकारी ने ऑपरेशन कायाकल्प के अंतर्गत विद्यालयों में कराए जा रहे कार्यों एवं आधारभूत सुविधाओं की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी विद्यालयों में पेयजल, विद्युतीकरण, टाईलीकरण, फर्नीचर, शौचालय एवं अन्य मूलभूत सुविधाएं समयबद्ध रूप से सुनिश्चित कराई जाएं।

जिलाधिकारी ने विद्यालयों में संचालित स्मार्ट क्लासों की गुणवत्ता की जानकारी एबीएसए से प्राप्त की तथा निर्देश दिए कि स्मार्ट क्लास के माध्यम से बच्चों को आधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने संपर्क टीवी प्रोग्राम एवं एस्ट्रोनॉमी लैब की प्रगति की भी समीक्षा की तथा नवाचार आधारित शिक्षण गतिविधियों को बढ़ावा देने पर बल दिया।

बैठक में पाठ्य पुस्तकों के वितरण की स्थिति की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि सभी बच्चों को समय से पुस्तकें उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम-2009 के अंतर्गत गैर सहायता प्राप्त मान्यता प्राप्त विद्यालयों में बच्चों के नामांकन की समीक्षा करते हुए कहा कि दुर्बल एवं वंचित वर्ग के बच्चों को प्रवेश न देने वाले विद्यालयों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

जिलाधिकारी ने मिड-डे मील योजना की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण एवं पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने विद्यालयों में बच्चों के व्यक्तित्व विकास हेतु संवाद प्रतियोगिता आयोजित कराने तथा प्रतिदिन समाचार वाचन की गतिविधियां संचालित कराने के निर्देश दिए।

बैठक में जिलाधिकारी ने सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया कि अपने-अपने क्षेत्रों के सबसे अच्छे एवं सबसे खराब विद्यालयों का चयन कर उसकी सूची अगली बैठक में प्रस्तुत करें, ताकि विद्यालयों की गुणवत्ता में सुधार हेतु आवश्यक कार्यवाही की जा सके।

बैठक के दौरान संबंधित अधिकारियों द्वारा विभागीय योजनाओं एवं प्रगति की जानकारी प्रस्तुत की गई, जिस पर जिलाधिकारी ने आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

Comments

Popular posts from this blog

रविंद्र प्रताप सिंह (रवि): वो शख्स जिसने मृत्यु के सन्नाटे में मानवता की आवाज़ बनकर 3800 शवों को दिया सम्मान

शमशान बना आशियाना, मोह माया से मुक्त मृत शरीरों में दिखा भगवान - रवि सिंह संवाददाता, लखनऊ l जब दुनिया ने अपने दरवाज़े बंद कर लिए थे, अपनों ने भी अपनों से मुँह फेर लिया था, अस्पतालों में साँसे रुक रही थीं और शमशान घाटों में चिताएं लगातार जल रही थीं — उस भयावह मंजर में एक चेहरा ऐसा भी था, जो लोगों को जीवन में नहीं परंतु मृत्यु के बाद सम्मान दे रहा था। नाम है रविंद्र प्रताप सिंह उर्फ रवि, जो न सिर्फ एक कर्मठ कर्मचारी हैं, बल्कि मानवता के सबसे कठिन इम्तहान में खरे उतरने वाले सच्चे योद्धा हैं। शमशान घाट बना तपोस्थली साल 2021, अप्रैल का महीना... लखनऊ का बैकुंठ धाम शवदाह गृह देश के सबसे व्यस्त शमशान घाटों में बदल चुका था। चिताओं की आग बुझने का नाम नहीं ले रही थी। उस दौरान जब अधिकांश कर्मचारी भय से दूर हो गए, रवि ने पीछे नहीं देखा। उन्होंने 8 अप्रैल से 8 जून 2021 तक दो माह तक शमशान में ही रहकर — 3800 से अधिक शवों का अंतिम संस्कार किया। यह सिर्फ आँकड़ा नहीं, हर एक शरीर के पीछे एक टूटता हुआ परिवार, एक आखिरी विदाई की पीड़ा, और रवि जैसे एक संवेदनशील हाथों की गरिमा थी। उनका कहना है — “मैंने मृत शरी...

“अफसरों की लापरवाही और सरकार की अनदेखी: उजड़ने की कगार पर संजय कॉलोनी भाटी माइंस”

जितेंद्र कुशवाहा दिल्ली के दक्षिणी इलाके में स्थित संजय कॉलोनी भाटी माइंस के लोग आज भी अपने अधिकार और अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहे हैं। यह वही कॉलोनी है, जिसे वर्ष 1976 में दिल्ली सरकार ने विधिवत बसाया था और यहां के निवासियों को पट्टे भी दिए गए थे। उस समय ग्रामीणों को यह भरोसा दिलाया गया था कि अब उन्हें एक स्थायी ठिकाना मिल गया है। लोग गांव से आए, मजदूरी की, और जीवनभर की कमाई लगाकर ईंट-पत्थर से अपने आशियाने खड़े किए। लेकिन 1991 में अफसरों की लापरवाही और सरकार की अनदेखी ने यहां के निवासियों की जिंदगी को अंधकार में धकेल दिया। अधिकारियों की एक गलत रिपोर्ट और अदूरदर्शी निर्णय के कारण पूरी कॉलोनी को रिज क्षेत्र (संरक्षित वन क्षेत्र) घोषित कर दिया गया। नतीजा यह हुआ कि 15 साल पहले जिन घरों को कानूनी मान्यता दी गई थी, वे अचानक “अवैध” हो गए। आज हालात यह हैं कि सरकार और प्रशासन उन्हीं घरों को तोड़ने पर आमादा है, जिन पर लोगों ने अपना खून-पसीना बहाकर जीवन की पूंजी लगा दी थी। इस अन्याय के खिलाफ आवाज उठाते हुए नव युवक ग्राम विकास समिति के सदस्य एवं ‘संसार जनकल्याण एक किरण फाउंडेशन’ के संस्थापक समाज...

नगर निकायों में कर्मचारियों से उच्च पद का कार्य लेना बंद होगा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने नगर निकायों में कार्यरत कर्मचारियों से उनके मूल पद से उच्च पद का कार्य लेने की प्रथा पर सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया गया है, जिसके तहत अब किसी भी नगर निकाय में कार्यरत कर्मचारी से उसके मूलपद से अधिक जिम्मेदारी वाला कार्य नहीं लिया जाएगा।  मुख्यमंत्री कार्यालय को ऑनलाइन संदर्भ संख्या 60000180127355 के माध्यम से एक शिकायत प्राप्त हुई थी, जिसमें यह उजागर किया गया था कि प्रदेश के कई नगर निकायों में कर्मचारियों से उनकी निर्धारित जिम्मेदारियों से अधिक काम लिया जा रहा है।  इस मामले पर 19 दिसंबर 2018 को संज्ञान लिया गया था, लेकिन अब इसे लेकर ठोस कार्यवाही सुनिश्चित की जा रही है। स्थानीय निकाय निदेशालय, गोमती नगर विस्तार, लखनऊ की ओर से यह निर्देश प्रदेश के समस्त नगर आयुक्तों, जलकल विभाग के महाप्रबंधकों, डिविजनल जल संस्थानों के प्रमुखों और नगर पालिका व नगर पंचायतों के अधिशासी अधिकारियों को भेजा गया है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि किसी भी कर्मचारी से उसके मूलपद से ऊपर के स्तर का कार्य लेना नि...