साहित्यकारों, वैज्ञानिकों और उनके शुभचिंतकों में गहरा शोक
अयोध्या से रवि मौर्य
अयोध्या।हिन्दी विज्ञान कथा साहित्य और कैंसर शोध के क्षेत्र की प्रतिष्ठित हस्ती डॉ. राजीव रंजन उपाध्याय का निधन हो गया। उनके निधन से साहित्य, विज्ञान और शिक्षाजगत में शोक की लहर दौड़ गई है।
4 मार्च 1942 को जन्मे डॉ. उपाध्याय ने लखनऊ विश्वविद्यालय से एम.एससी. तथा काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी से पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की थी। उन्होंने नॉर्वे और जर्मनी में भी उच्च शोध कार्य किया तथा ईरान के तबरीज़ विश्वविद्यालय में कैंसर शोध के प्रोफेसर के रूप में सेवाएं दीं।
डॉ. उपाध्याय हिन्दी विज्ञान कथा साहित्य के अग्रणी रचनाकारों में गिने जाते थे। उनकी अनेक विज्ञान कथाएं राष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुईं तथा कुछ रचनाओं का हिब्रू और बंगला भाषाओं में भी अनुवाद हुआ। उनकी प्रमुख कृतियों में वैज्ञानिक लघु कथाएँ, आधुनिक विज्ञान कथाएँ, सूर्यग्रहण, आधुनिक ययाति, वे चन्द्रमा से आये, वैज्ञानिक पुरा कथाएँ, उत्तरी आकाशगंगा में, एक और शिखण्डी, आधी रात का सूर्य तथा चर्चित विज्ञान कथाएँ शामिल हैं।
उन्होंने कैंसर शोध के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया और सौ से अधिक शोध-पत्र प्रकाशित किए। साहित्य एवं विज्ञान के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें ईरान कैंसर शोध पुरस्कार, विज्ञान-कथा-भूषण सम्मान, विज्ञान-वाचस्पति मानद उपाधि, भारत गौरव तथा विज्ञान परिषद् प्रयाग सम्मान सहित अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित किया गया।
डॉ. राजीव रंजन उपाध्याय का निधन हिन्दी विज्ञान कथा साहित्य और वैज्ञानिक चिंतन के लिए अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। साहित्यकारों, वैज्ञानिकों और उनके शुभचिंतकों ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है।

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