Skip to main content

लखनऊ की कर्णिका मौर्या ने बढ़ाया प्रदेश का मान, 'मिस टीन दीवा इंडिया' में करेंगी प्रतिनिधित्व

प्रमुख संवाददाता

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की उभरती हुई युवा प्रतिभा कर्णिका मौर्या अब राष्ट्रीय मंच पर अपनी चमक बिखेरने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। मिस टीन दीवा उत्तर प्रदेश का प्रतिष्ठित खिताब जीतने के बाद कर्णिका अब 19 जुलाई को जयपुर में आयोजित होने वाली 'मिस टीन दीवा इंडिया' प्रतियोगिता में उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व करेंगी। इस खास अवसर पर क्वीनिफाइड इवेंट्स ओपीसी प्राइवेट लिमिटेड द्वारा राजधानी लखनऊ में पत्रकार वार्ता का आयोजन किया गया, जहां मीडिया के सामने कर्णिका की तैयारियों, उनके सपनों और इस सफर की कहानी साझा की गई।

संस्था की फाउंडर प्रीति यादव ने कहा कि कर्णिका मौर्या ने अपनी मेहनत, अनुशासन, आत्मविश्वास और शानदार व्यक्तित्व के दम पर मिस टीन दीवा उत्तर प्रदेश का ताज अपने नाम किया है। अब वह राष्ट्रीय मंच पर उत्तर प्रदेश की पहचान को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि कर्णिका में वह हर गुण मौजूद है, जो उन्हें एक मजबूत और प्रेरणादायक प्रतियोगी बनाता है।

पत्रकारों से बातचीत के दौरान कर्णिका मौर्या ने कहा कि यह सफर उनके लिए किसी सपने के सच होने जैसा है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय मंच पर उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व करना उनके लिए गर्व और जिम्मेदारी दोनों है। कर्णिका ने कहा कि वह प्रतियोगिता के लिए पूरी निष्ठा के साथ तैयारी कर रही हैं और उनका प्रयास रहेगा कि अपने प्रदर्शन से न केवल प्रदेश, बल्कि पूरे देश का दिल जीत सकें।

प्रीति यादव ने कहा कि क्वीनिफाइड इवेंट्स ओपीसी प्राइवेट लिमिटेड का उद्देश्य केवल ब्यूटी पेजेंट आयोजित करना नहीं, बल्कि ऐसी प्रतिभाशाली युवतियों को मंच देना है, जो अपनी सोच, व्यक्तित्व, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक जिम्मेदारियों के साथ समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकें। संस्था लगातार उत्तर प्रदेश की बेटियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने के लिए काम कर रही है।

पत्रकार वार्ता में मौजूद मीडिया प्रतिनिधियों ने कर्णिका को राष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए शुभकामनाएं दीं और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। अब सभी की निगाहें 19 जुलाई को जयपुर में होने वाली 'मिस टीन दीवा इंडिया' प्रतियोगिता पर टिकी हैं, जहां उत्तर प्रदेश की यह प्रतिभाशाली बेटी अपने हुनर, आत्मविश्वास और व्यक्तित्व से नया इतिहास रचने के इरादे के साथ मंच पर उतरेगी।

Comments

Popular posts from this blog

रविंद्र प्रताप सिंह (रवि): वो शख्स जिसने मृत्यु के सन्नाटे में मानवता की आवाज़ बनकर 3800 शवों को दिया सम्मान

शमशान बना आशियाना, मोह माया से मुक्त मृत शरीरों में दिखा भगवान - रवि सिंह संवाददाता, लखनऊ l जब दुनिया ने अपने दरवाज़े बंद कर लिए थे, अपनों ने भी अपनों से मुँह फेर लिया था, अस्पतालों में साँसे रुक रही थीं और शमशान घाटों में चिताएं लगातार जल रही थीं — उस भयावह मंजर में एक चेहरा ऐसा भी था, जो लोगों को जीवन में नहीं परंतु मृत्यु के बाद सम्मान दे रहा था। नाम है रविंद्र प्रताप सिंह उर्फ रवि, जो न सिर्फ एक कर्मठ कर्मचारी हैं, बल्कि मानवता के सबसे कठिन इम्तहान में खरे उतरने वाले सच्चे योद्धा हैं। शमशान घाट बना तपोस्थली साल 2021, अप्रैल का महीना... लखनऊ का बैकुंठ धाम शवदाह गृह देश के सबसे व्यस्त शमशान घाटों में बदल चुका था। चिताओं की आग बुझने का नाम नहीं ले रही थी। उस दौरान जब अधिकांश कर्मचारी भय से दूर हो गए, रवि ने पीछे नहीं देखा। उन्होंने 8 अप्रैल से 8 जून 2021 तक दो माह तक शमशान में ही रहकर — 3800 से अधिक शवों का अंतिम संस्कार किया। यह सिर्फ आँकड़ा नहीं, हर एक शरीर के पीछे एक टूटता हुआ परिवार, एक आखिरी विदाई की पीड़ा, और रवि जैसे एक संवेदनशील हाथों की गरिमा थी। उनका कहना है — “मैंने मृत शरी...

“अफसरों की लापरवाही और सरकार की अनदेखी: उजड़ने की कगार पर संजय कॉलोनी भाटी माइंस”

जितेंद्र कुशवाहा दिल्ली के दक्षिणी इलाके में स्थित संजय कॉलोनी भाटी माइंस के लोग आज भी अपने अधिकार और अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहे हैं। यह वही कॉलोनी है, जिसे वर्ष 1976 में दिल्ली सरकार ने विधिवत बसाया था और यहां के निवासियों को पट्टे भी दिए गए थे। उस समय ग्रामीणों को यह भरोसा दिलाया गया था कि अब उन्हें एक स्थायी ठिकाना मिल गया है। लोग गांव से आए, मजदूरी की, और जीवनभर की कमाई लगाकर ईंट-पत्थर से अपने आशियाने खड़े किए। लेकिन 1991 में अफसरों की लापरवाही और सरकार की अनदेखी ने यहां के निवासियों की जिंदगी को अंधकार में धकेल दिया। अधिकारियों की एक गलत रिपोर्ट और अदूरदर्शी निर्णय के कारण पूरी कॉलोनी को रिज क्षेत्र (संरक्षित वन क्षेत्र) घोषित कर दिया गया। नतीजा यह हुआ कि 15 साल पहले जिन घरों को कानूनी मान्यता दी गई थी, वे अचानक “अवैध” हो गए। आज हालात यह हैं कि सरकार और प्रशासन उन्हीं घरों को तोड़ने पर आमादा है, जिन पर लोगों ने अपना खून-पसीना बहाकर जीवन की पूंजी लगा दी थी। इस अन्याय के खिलाफ आवाज उठाते हुए नव युवक ग्राम विकास समिति के सदस्य एवं ‘संसार जनकल्याण एक किरण फाउंडेशन’ के संस्थापक समाज...

नगर निकायों में कर्मचारियों से उच्च पद का कार्य लेना बंद होगा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने नगर निकायों में कार्यरत कर्मचारियों से उनके मूल पद से उच्च पद का कार्य लेने की प्रथा पर सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया गया है, जिसके तहत अब किसी भी नगर निकाय में कार्यरत कर्मचारी से उसके मूलपद से अधिक जिम्मेदारी वाला कार्य नहीं लिया जाएगा।  मुख्यमंत्री कार्यालय को ऑनलाइन संदर्भ संख्या 60000180127355 के माध्यम से एक शिकायत प्राप्त हुई थी, जिसमें यह उजागर किया गया था कि प्रदेश के कई नगर निकायों में कर्मचारियों से उनकी निर्धारित जिम्मेदारियों से अधिक काम लिया जा रहा है।  इस मामले पर 19 दिसंबर 2018 को संज्ञान लिया गया था, लेकिन अब इसे लेकर ठोस कार्यवाही सुनिश्चित की जा रही है। स्थानीय निकाय निदेशालय, गोमती नगर विस्तार, लखनऊ की ओर से यह निर्देश प्रदेश के समस्त नगर आयुक्तों, जलकल विभाग के महाप्रबंधकों, डिविजनल जल संस्थानों के प्रमुखों और नगर पालिका व नगर पंचायतों के अधिशासी अधिकारियों को भेजा गया है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि किसी भी कर्मचारी से उसके मूलपद से ऊपर के स्तर का कार्य लेना नि...