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जलसा ए सीरत ने दिया मानवता का संदेश

पैगंबर को मानने वाले हैं तो उनके जैसा चरित्र बनायें-मौलाना फारुकी 

जाहिद अली

लखनऊ,1सितंबर। मड़ियांव में स्थित मस्जिद खालिद सैफुल्लाह द्वारा आयोजित जलसा-ए-सीरत में इस्लामिक महीने रबी उल अव्वल के साथ पैगंबर मोहम्मद के संबंधों पर तकरीरें पेश हुईं।तालीमे मिल्लत मदरसे के उस्ताद कारी सलमान ने कुरान की तिलावत से जलसे का आगाज किया। 

मुख्य अतिथि ऐशबाग ईदगाह के इमाम मौलाना खालिद रशीद फिरंगीमहली ने बताया कि पैगंबर मोहम्मद के पैगाम पूरी इंसानियत के लिये हैं। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण से लेकर औरतों, बच्चों, बुजुर्गों और मां- बाप से जुड़े कर्तव्यों के दिशानिर्देश दिये हैं जिनसे पूरी इंसानियत सही राह पहचान रही है। 

काकोरी के दारुल उलूम फारुकिया के मौलाना अब्दुल अली फारुकी ने बताया कि मक्का के बाशिंदों ने पैगंबर मोहम्मद के साथ किस तरह

दुर्व्यवहार किया था और कैसे उन्हें मदीने के लोगों ने सिर आंखों पर बैठाया था,ये बातें नयी पीढ़ी को बताने की जरूरत है। इसके साथ ही उन्होंने पैगंबर मोहम्मद की जिंदगी जीने के तौर-तरीकों पर पूरी तरह अमल करने को ही कुरान की असल पाबंदगी साबित किया।

जलसे की अध्यक्षता करते हुए मौलाना कौसर नदवी ने फ़रमाया कि अल्लाह केवल नीयत देखता है और नीयत की पाबंदी के लिये सीरत से बड़ी कोई ताकत नहीं है। उन्होंने फरमाया कि नशे से दूर रहना,ब्याज न लेना,रिश्वत न लेना और हराम की कमाई और आदतों से दूरी बनाना हर सच्चे मुसलमान का फर्ज होना चाहिये ताकि कयामत के दिन पैगंबर को मायूस और शर्मिंदा न होना पड़े।

रात नौ बजे से शुरू इस जलसे की बाखूब निजामत मौलाना जमाल अहमद नदवी ने की।

इस मौके पर मड़ियांव और आसपास के इलाकों के अलावा दूरदराज से आये मुस्लिम युवा भी बड़ी संख्या में नजर आये।इस मौके पैगंबर मोहम्मद की जिंदगी पर रोशनी डालते हुए मोहम्मद नोमान और मोहम्मद इंतखाब ने खूबसूरत नातें पेश कीं।जलसा-ए-सीरत के सफल आयोजन में मौलाना नूरुलहक नदवी,मौलाना नसीम नदवी,मौलाना उमर नदवी और मौलाना वसीम का विशेष योगदान रहा।

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