Skip to main content

युवाओं के सामाजिक मूल्यों का मूल्यांकन आज की सबसे बड़ी आवश्यकता : जितेन्द्र कुशवाहा

प्रमुख संवाददाता

नई दिल्ली। समाजसेवी एवं संसार जनकल्याण एक किरण फाउंडेशन के संस्थापक जितेन्द्र कुशवाहा ने कहा कि वर्तमान समय में युवाओं के सामाजिक मूल्यों का मूल्यांकन करना अत्यंत आवश्यक हो गया है। उन्होंने कहा कि युवा किसी भी राष्ट्र की रीढ़ होते हैं और यदि उनके भीतर नैतिकता, जिम्मेदारी, संवेदनशीलता और समाज के प्रति कर्तव्यबोध मजबूत होगा, तभी एक सशक्त और समरस समाज का निर्माण संभव है।


एक सामाजिक कार्यक्रम के दौरान युवाओं के बीच अपने विचार रखते हुए जितेन्द्र कुशवाहा ने कहा कि आज का युवा वर्ग तकनीक, सोशल मीडिया और आधुनिक संसाधनों से तो जुड़ा हुआ है, लेकिन कई बार सामाजिक मूल्यों से दूरी बनाता नजर आता है। ऐसे में परिवार, शिक्षा संस्थानों और सामाजिक संगठनों की सामूहिक जिम्मेदारी है कि वे युवाओं को संस्कार, सेवा, अनुशासन और सामाजिक सहभागिता से जोड़ें। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा केवल डिग्री तक सीमित न रहकर चरित्र निर्माण का मजबूत आधार बने।


कार्यक्रम के दौरान समाज के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े गणमान्य व्यक्तियों द्वारा जितेन्द्र कुशवाहा को पुष्प गुच्छ देकर सम्मानित किया गया। सम्मान करने वालों में डॉक्टर आलोक कुमार, शिक्षक अमित कुमार, व्यवसायी हरीश शर्मा, शिक्षाविद संतोष शर्मा, सोशल गुरु संजय भाई, अधिवक्ता रोहित शुभम एवं प्रोफेसर विनय कुशवाहा प्रमुख रूप से शामिल रहे। सभी अतिथियों ने उनके द्वारा किए जा रहे सामाजिक कार्यों और युवाओं के बीच जागरूकता अभियान की सराहना की।


जितेन्द्र कुशवाहा ने कहा कि दहेज प्रथा, नशा, सामाजिक भेदभाव और पर्यावरण संकट जैसी चुनौतियों से निपटने में युवाओं की भूमिका निर्णायक है। यदि युवाओं को सही दिशा और सकारात्मक मंच मिले, तो वे समाज और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपने अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों को भी समझें और सामाजिक मूल्यों को आत्मसात कर एक बेहतर भारत के निर्माण में सहभागी बनें।

Comments

Popular posts from this blog

दलित सफाई कर्मचारी संगठनों को नहीं मिला निमंत्रण, सरकार पर भेदभाव का आरोप

आठवें वेतन आयोग की बैठक में सफाई कर्मचारी संगठनों की उपेक्षा पर भड़का आक्रोश सफाई कर्मचारियों की समस्याएं वेतन आयोग तक पहुंचने से रोकने का आरोप, नेताओं ने जताई नाराजगी मनोज कुमार मौर्य   आगरा। एक ओर देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सफाई कर्मचारियों के पाॅव धोकर उनके कार्य और परिश्रम को नमन करते हैं। वहीं दूसरी ओर उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ की सरकार की नौकर शाही उत्तर प्रदेश के सफाई कर्मचारी संगठनों की उपेक्षा करके उन्हें हतोत्साहित कर रही है। यह स्थिति असहनीय है। यह बात उत्तर प्रदेश स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ के वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष विनोद इलाहाबादी एवं उत्तर प्रदेश सफाई कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुन्दर बाबू चंचल ने अपनी एक प्रेस विज्ञप्ति में कही है। उन्होंने कहा कि वित्त विभाग के विशेष सचिव पुष्प राज ने उत्तर प्रदेश शासन वित्त ( वेतन आयोग) अनुभाग-2 संख्या- वे आ०-2-387/ दस- 2026 लखनऊ: 08 जून 2026 के द्वारा शासनादेश जारी करते हुए दिनांक 22-23 जून 2026 को लखनऊ में आठवें केन्द्रीय वेतन आयोग के सदस्य की होने बाली बैठक में उत्तर प्रदेश सरकार के अलग अलग विभागों के 24 कर्म...

रविंद्र प्रताप सिंह (रवि): वो शख्स जिसने मृत्यु के सन्नाटे में मानवता की आवाज़ बनकर 3800 शवों को दिया सम्मान

शमशान बना आशियाना, मोह माया से मुक्त मृत शरीरों में दिखा भगवान - रवि सिंह संवाददाता, लखनऊ l जब दुनिया ने अपने दरवाज़े बंद कर लिए थे, अपनों ने भी अपनों से मुँह फेर लिया था, अस्पतालों में साँसे रुक रही थीं और शमशान घाटों में चिताएं लगातार जल रही थीं — उस भयावह मंजर में एक चेहरा ऐसा भी था, जो लोगों को जीवन में नहीं परंतु मृत्यु के बाद सम्मान दे रहा था। नाम है रविंद्र प्रताप सिंह उर्फ रवि, जो न सिर्फ एक कर्मठ कर्मचारी हैं, बल्कि मानवता के सबसे कठिन इम्तहान में खरे उतरने वाले सच्चे योद्धा हैं। शमशान घाट बना तपोस्थली साल 2021, अप्रैल का महीना... लखनऊ का बैकुंठ धाम शवदाह गृह देश के सबसे व्यस्त शमशान घाटों में बदल चुका था। चिताओं की आग बुझने का नाम नहीं ले रही थी। उस दौरान जब अधिकांश कर्मचारी भय से दूर हो गए, रवि ने पीछे नहीं देखा। उन्होंने 8 अप्रैल से 8 जून 2021 तक दो माह तक शमशान में ही रहकर — 3800 से अधिक शवों का अंतिम संस्कार किया। यह सिर्फ आँकड़ा नहीं, हर एक शरीर के पीछे एक टूटता हुआ परिवार, एक आखिरी विदाई की पीड़ा, और रवि जैसे एक संवेदनशील हाथों की गरिमा थी। उनका कहना है — “मैंने मृत शरी...

नगर निकायों में कर्मचारियों से उच्च पद का कार्य लेना बंद होगा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने नगर निकायों में कार्यरत कर्मचारियों से उनके मूल पद से उच्च पद का कार्य लेने की प्रथा पर सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया गया है, जिसके तहत अब किसी भी नगर निकाय में कार्यरत कर्मचारी से उसके मूलपद से अधिक जिम्मेदारी वाला कार्य नहीं लिया जाएगा।  मुख्यमंत्री कार्यालय को ऑनलाइन संदर्भ संख्या 60000180127355 के माध्यम से एक शिकायत प्राप्त हुई थी, जिसमें यह उजागर किया गया था कि प्रदेश के कई नगर निकायों में कर्मचारियों से उनकी निर्धारित जिम्मेदारियों से अधिक काम लिया जा रहा है।  इस मामले पर 19 दिसंबर 2018 को संज्ञान लिया गया था, लेकिन अब इसे लेकर ठोस कार्यवाही सुनिश्चित की जा रही है। स्थानीय निकाय निदेशालय, गोमती नगर विस्तार, लखनऊ की ओर से यह निर्देश प्रदेश के समस्त नगर आयुक्तों, जलकल विभाग के महाप्रबंधकों, डिविजनल जल संस्थानों के प्रमुखों और नगर पालिका व नगर पंचायतों के अधिशासी अधिकारियों को भेजा गया है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि किसी भी कर्मचारी से उसके मूलपद से ऊपर के स्तर का कार्य लेना नि...