Skip to main content

लखनऊ बार एसोसिएशन की गहमागहमी ने पकड़ा जोर

अधिवक्ता पेशे की गिरती प्रतिष्ठा बचाने का चुनाव

जाहिद अली

लखनऊ,।लखनऊ जिला कलेक्ट्रेट के चारों ओर का माहौल ग्रामप्रधानी और विधानसभा चुनावों जैसा हो गया है। रोजाना अपने मुवाकिलों की पैरवी के लिए दौड़भाग करते वकील अब अपने समर्थकों के साथ बैठकें करते और कचहरी परिसर में जनसम्पर्क करते देखे जा सकते हैं। मुद्दे तमाम हैं लेकिन फिलहाल जोर अधिवक्ताओं की समस्याओं को समाप्त कराना और सरकारी व्यवस्था में लेटलतीफी के कारण मुवक्किलों को होने वाली परेशानियों को कम कराने पर है। लखनऊ कचहरी परिसर में हुए निर्माणकार्य के कारण पिछले तमाम चुनावों में उठाये जाने वाले मुद्दे इस बार के चुनावों में कहीं नजर नहीं आ रहे हैं लेकिन लखनऊ बार एसोसिएशन के चुनावों की सरगर्मियों ने रोजाना के बोझिल माहौल को उत्साहपूर्ण और मित्रतापूर्ण जरूर बना दिया है। 


मसल पावर और मनी पावर को अलविदा


युवा वकीलों की एक टोली मिली जो लखनऊ कचहरी परिसर में बढ़ती भूमाफिया गतिविधियों को लेकर चिंतित नजर आयी। इन वकीलों का कहना है कि अब लखनऊ महानगर में तमाम कुख्यात भूमाफिया अब नाम के साथ एडवोकेट का तमगा लटकाये चल रहे हैं जबकि हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की तमाम नसीहतें इस पेशे की प्रतिष्ठा बचाने के लिए आ चुकी लेकिन दुखद बात यह है कि कोई सुनने वाला नहीं है। 

लोग अधिवक्ता के पेशे में आने के बाद दबाव डालकर फैसले करवाने के लिए चुनाव लड़ रहे हैं जबकि उन्हें अधिवक्ताओं की जरूरी समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए। 

लखनऊ बार एसोसिएशन चुनावों में मसल पावर और मनी पावर के दम पर चुनाव जीतने-जिताने की परम्परा अब दम तोड़ रही है।


अधिवक्ता पेशे की प्रतिष्ठा बचाने की लड़ाई 


एडवोकेट परशुराम मिश्रा लखनऊ बार एसोसिएशन में उपाध्यक्ष रह चुके हैं। इस बार वे अध्यक्ष पद के प्रत्याशी हैं। उनके समर्थकों में युवा और बुजुर्ग वकीलों की खासी संख्या नजर आती है। परशुराम मिश्रा के समर्थकों ने बताया कि अधिवक्ता पेशे की गिरती सामाजिक प्रतिष्ठा को बचाना प्रमुख मुद्दा है जिसे लेकर एडवोकेट परशुराम मिश्रा इस बार चुनावी मैदान में उतरे है।उनका सामना अध्यक्ष पद के लिए दावेदार जिन दूसरे अधिवक्ताओं से है उनमें एडवोकेट सुरेश पांडेय का नाम प्रमुख है।


टूट रही हैंआचार संहिता की सीमाएं 


लखनऊ कचहरी में वकीलों का नेता बनने का उत्साह इतना है कि एडवोकेट विनायक सिंह ने केन्द्रीय पुरातत्व विभाग की संरक्षित ऐतिहासिक धरोहरों में से एक कैसरबाग के विश्व प्रसिद्ध मछली फाटक पर ही अपना लम्बाचौड़ा 

विज्ञापन लटका दिया है।कुछ अन्य प्रत्याशी वकीलों ने इस ऐतिहासिक इमारत की दीवारों पर अपने पोस्टरों- बैनरों की नुमाइश कर दी है।आने वाले समय में यह उत्साह और जोर पकड़ता नज़र आयेगा।

Comments

Popular posts from this blog

दलित सफाई कर्मचारी संगठनों को नहीं मिला निमंत्रण, सरकार पर भेदभाव का आरोप

आठवें वेतन आयोग की बैठक में सफाई कर्मचारी संगठनों की उपेक्षा पर भड़का आक्रोश सफाई कर्मचारियों की समस्याएं वेतन आयोग तक पहुंचने से रोकने का आरोप, नेताओं ने जताई नाराजगी मनोज कुमार मौर्य   आगरा। एक ओर देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सफाई कर्मचारियों के पाॅव धोकर उनके कार्य और परिश्रम को नमन करते हैं। वहीं दूसरी ओर उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ की सरकार की नौकर शाही उत्तर प्रदेश के सफाई कर्मचारी संगठनों की उपेक्षा करके उन्हें हतोत्साहित कर रही है। यह स्थिति असहनीय है। यह बात उत्तर प्रदेश स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ के वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष विनोद इलाहाबादी एवं उत्तर प्रदेश सफाई कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुन्दर बाबू चंचल ने अपनी एक प्रेस विज्ञप्ति में कही है। उन्होंने कहा कि वित्त विभाग के विशेष सचिव पुष्प राज ने उत्तर प्रदेश शासन वित्त ( वेतन आयोग) अनुभाग-2 संख्या- वे आ०-2-387/ दस- 2026 लखनऊ: 08 जून 2026 के द्वारा शासनादेश जारी करते हुए दिनांक 22-23 जून 2026 को लखनऊ में आठवें केन्द्रीय वेतन आयोग के सदस्य की होने बाली बैठक में उत्तर प्रदेश सरकार के अलग अलग विभागों के 24 कर्म...

रविंद्र प्रताप सिंह (रवि): वो शख्स जिसने मृत्यु के सन्नाटे में मानवता की आवाज़ बनकर 3800 शवों को दिया सम्मान

शमशान बना आशियाना, मोह माया से मुक्त मृत शरीरों में दिखा भगवान - रवि सिंह संवाददाता, लखनऊ l जब दुनिया ने अपने दरवाज़े बंद कर लिए थे, अपनों ने भी अपनों से मुँह फेर लिया था, अस्पतालों में साँसे रुक रही थीं और शमशान घाटों में चिताएं लगातार जल रही थीं — उस भयावह मंजर में एक चेहरा ऐसा भी था, जो लोगों को जीवन में नहीं परंतु मृत्यु के बाद सम्मान दे रहा था। नाम है रविंद्र प्रताप सिंह उर्फ रवि, जो न सिर्फ एक कर्मठ कर्मचारी हैं, बल्कि मानवता के सबसे कठिन इम्तहान में खरे उतरने वाले सच्चे योद्धा हैं। शमशान घाट बना तपोस्थली साल 2021, अप्रैल का महीना... लखनऊ का बैकुंठ धाम शवदाह गृह देश के सबसे व्यस्त शमशान घाटों में बदल चुका था। चिताओं की आग बुझने का नाम नहीं ले रही थी। उस दौरान जब अधिकांश कर्मचारी भय से दूर हो गए, रवि ने पीछे नहीं देखा। उन्होंने 8 अप्रैल से 8 जून 2021 तक दो माह तक शमशान में ही रहकर — 3800 से अधिक शवों का अंतिम संस्कार किया। यह सिर्फ आँकड़ा नहीं, हर एक शरीर के पीछे एक टूटता हुआ परिवार, एक आखिरी विदाई की पीड़ा, और रवि जैसे एक संवेदनशील हाथों की गरिमा थी। उनका कहना है — “मैंने मृत शरी...

नगर निकायों में कर्मचारियों से उच्च पद का कार्य लेना बंद होगा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने नगर निकायों में कार्यरत कर्मचारियों से उनके मूल पद से उच्च पद का कार्य लेने की प्रथा पर सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया गया है, जिसके तहत अब किसी भी नगर निकाय में कार्यरत कर्मचारी से उसके मूलपद से अधिक जिम्मेदारी वाला कार्य नहीं लिया जाएगा।  मुख्यमंत्री कार्यालय को ऑनलाइन संदर्भ संख्या 60000180127355 के माध्यम से एक शिकायत प्राप्त हुई थी, जिसमें यह उजागर किया गया था कि प्रदेश के कई नगर निकायों में कर्मचारियों से उनकी निर्धारित जिम्मेदारियों से अधिक काम लिया जा रहा है।  इस मामले पर 19 दिसंबर 2018 को संज्ञान लिया गया था, लेकिन अब इसे लेकर ठोस कार्यवाही सुनिश्चित की जा रही है। स्थानीय निकाय निदेशालय, गोमती नगर विस्तार, लखनऊ की ओर से यह निर्देश प्रदेश के समस्त नगर आयुक्तों, जलकल विभाग के महाप्रबंधकों, डिविजनल जल संस्थानों के प्रमुखों और नगर पालिका व नगर पंचायतों के अधिशासी अधिकारियों को भेजा गया है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि किसी भी कर्मचारी से उसके मूलपद से ऊपर के स्तर का कार्य लेना नि...