रिपोर्ट ब्यूरो रवि मौर्य
अयोध्या। प्रगतिशील लेखक संघ (प्रलेस) और जनवादी लेखक संघ (जलेस), फैजाबाद के संयुक्त तत्वावधान में गुरुवार को शहर के एक होटल सभागार में महान साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर ‘साहित्य, समाज और राजनीति : प्रेमचंद की वैचारिक विरासत’ विषयक गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में साहित्यकारों, लेखकों, पत्रकारों और साहित्य प्रेमियों ने प्रेमचंद के साहित्यिक योगदान तथा उनकी वैचारिक विरासत पर विस्तार से विचार व्यक्त किए।
गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ कवि एवं साहित्यकार स्वप्निल श्रीवास्तव ने कहा कि प्रेमचंद हमारे वैचारिक पुरखे हैं। उन्होंने साहित्य और समाज को देखने की जो दृष्टि दी, वह आज भी मार्गदर्शक बनी हुई है। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद की रचनाएं वर्तमान समय में भी उतनी ही प्रासंगिक हैं, जितनी उनके समय में थीं।
मुख्य वक्ता आलोचक रघुवंशमणि ने कहा कि प्रेमचंद ने साहित्य के प्रति समाज की सोच को बदलने का कार्य किया। उनकी प्रगतिशील दृष्टि आज भी लोकतांत्रिक और मानवीय मूल्यों की रक्षा के लिए प्रेरणा देती है। कवि-चिंतक आर.डी. आनंद ने प्रेमचंद के यथार्थवाद की चर्चा करते हुए कहा कि उनके साहित्य में सामाजिक परिवर्तन की चेतना स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।
लेखिका विनीता कुशवाहा ने कहा कि प्रेमचंद की रचनाएं समाज के वंचित और शोषित वर्गों की पीड़ा को सजीव रूप में प्रस्तुत करती हैं। वहीं कवि एवं प्राध्यापक विशाल श्रीवास्तव ने कहा कि प्रेमचंद की वैचारिक विरासत को समझने के लिए गहरी सामाजिक, राजनीतिक और वैज्ञानिक दृष्टि की आवश्यकता है।
जनमोर्चा समाचार पत्र की संपादक डॉ. सुमन गुप्ता ने कहा कि प्रेमचंद ने अपनी कहानियों में जिन सामाजिक विसंगतियों को चित्रित किया था, उनमें से अनेक आज भी समाज में मौजूद हैं। वरिष्ठ शायर रामजीत यादव ‘बेदार’ ने कहा कि प्रेमचंद की कहानियां समाज को मानवीय संवेदनाओं से जोड़ने का कार्य करती हैं।
कार्यक्रम में मो. ज़फर, डॉ. राजकिशोर, पूजा श्रीवास्तव, नाज़िश फ़ातिमा तथा विंध्यमणि सहित अन्य वक्ताओं ने भी प्रेमचंद के साहित्य और उनकी सामाजिक दृष्टि पर अपने विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य आज भी नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है।
अंत में सत्यभान सिंह जनवादी ने सभी आगंतुकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रेमचंद की रचनाएं आने वाली पीढ़ियों को भी समाज के प्रति जिम्मेदारी और मानवीय मूल्यों का संदेश देती रहेंगी।
इस अवसर पर अशोक कुमार तिवारी, राजीव श्रीवास्तव, अखिलेश सिंह, मुज़म्मिल फ़िदा, रामदास सरल, अयोध्या प्रसाद तिवारी, प्रेरणा, डॉ. रणजीत वर्मा, विनय करुण, मांडवी सिंह, चन्द्रभान, उमाकांत विश्वकर्मा, जय प्रकाश श्रीवास्तव, प्रशांत आनंद, शिवांगी नंद, कुमकुम भाग्य, शैलेन्द्र सिंह, महावीर पाल सहित बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी, संस्कृतिकर्मी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।


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