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स्वर्गीय शीतला सिंह के आवास को खाली कराने की कार्रवाई पर उठे सवाल, पत्रकार जगत में नाराजगी

प्रमुख संवाददाता

अयोध्या। वरिष्ठ पत्रकार एवं जनमोर्चा के संस्थापक संपादक स्वर्गीय शीतला सिंह के पत्रकारिता प्रशिक्षण संस्थान  से जुड़े सरकारी आवास संख्या चार को जिला प्रशासन द्वारा खाली कराए जाने की कार्रवाई को लेकर पत्रकारिता जगत में चर्चा और नाराजगी का माहौल है। परिवार का आरोप है कि सरकारी आवास संख्या 4 खाली कराने से पूर्व न तो किसी प्रकार का लिखित नोटिस दिया गया और न ही उन्हें विधिवत अवगत कराया गया।

मिली जानकारी के अनुसार  स्वर्गीय शीतला सिंह की पत्नी के निधन के बाद 28 जुलाई को त्रयोदश संस्कार (तेरही) का कार्यक्रम निर्धारित था। इसी बीच 21 जुलाई को संयुक्त मजिस्ट्रेट के नाम आवास का आवंटन किए जाने संबंधी पत्र जारी किया गया, जिसमें आवास को तीन वर्षों से रिक्त बताया गया। आरोप है कि इस संबंध में 26 जुलाई को तहसीलदार द्वारा परिवार को मौखिक रूप से जानकारी देते हुए तत्काल मकान खाली करने के लिए कहा गया।

परिवार का कहना है कि उन्होंने 28 जुलाई को तेरही कार्यक्रम संपन्न होने के बाद आवास खाली करने पर विचार करने की बात कही थी, लेकिन इसके बावजूद 26 जुलाई से 3 अगस्त तक लगातार मकान खाली करने का दबाव बनाया जाता रहा। आरोप है कि 4 अगस्त की सुबह प्रशासनिक टीम ने आवास का ताला तोड़कर अंदर रखा सामान बाहर निकलवा दिया।

परिजनों के अनुसार निकाले गए सामान में तख्त, बिस्तर, कुर्सियां, अलमारियां, गैस चूल्हा, बर्तन, सोफा सेट, आवश्यक दस्तावेज तथा अन्य घरेलू सामग्री शामिल थी। उनका कहना है कि यदि आवास वास्तव में लंबे समय से रिक्त माना जा रहा था तो नियमानुसार पूर्व में नोटिस देकर प्रक्रिया पूरी की जानी चाहिए थी।

इस कार्रवाई को लेकर कई पत्रकारों और सामाजिक संगठनों ने चिंता व्यक्त की है। वहीं प्रशासन की ओर से इस संबंध में आधिकारिक पक्ष सामने आने का इंतजार किया जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि स्वर्गीय शीतला सिंह हिंदी पत्रकारिता के प्रमुख स्तंभों में गिने जाते थे और लंबे समय तक जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को मुखरता से उठाते रहे। ऐसे में उनके परिवार से जुड़े इस प्रकरण ने पत्रकारिता जगत का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है।

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