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पारसनाथ यादव का छलका दर्द, बोले- ‘पारस ही पापी क्यों?’

ब्यूरो रिपोर्ट रवि मौर्य 

अयोध्या। समाजवादी पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष पारसनाथ यादव ने संगठन में हुए हालिया बदलाव के बाद अपने आवास पर पत्रकारों से बातचीत में अपनी पीड़ा सार्वजनिक करते हुए कहा कि उन्हें अपने कार्यकाल और पार्टी के लिए किए गए कार्यों का परिणाम भुगतना पड़ा है। उन्होंने कहा कि वह पिछले लगभग 35 वर्षों से समाजवादी पार्टी की निष्ठापूर्वक सेवा कर रहे हैं और आगे भी करते रहेंगे।

पारसनाथ यादव ने अपने राजनीतिक सफर का उल्लेख करते हुए बताया कि वर्ष 1992 में उन्होंने पूर्वांचल के सबसे बड़े महाविद्यालयों में शामिल अयोध्या छात्रसंघ चुनाव में विजय प्राप्त की थी। उस उपलब्धि पर तत्कालीन मुख्यमंत्री एवं समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव ने उन्हें सम्मानित किया था। इसके बाद वह कई बार जिला पंचायत सदस्य निर्वाचित हुए तथा निर्विरोध सहकारी समिति के निदेशक भी चुने गए।

पूर्व जिलाध्यक्ष ने कहा कि उनके लगभग चार वर्ष के कार्यकाल में समाजवादी पार्टी ने अयोध्या से एक चर्चित सांसद दिया। नगर निकाय चुनावों में पार्टी को उल्लेखनीय सफलता मिली और लगभग 50 प्रतिशत सभासदों तथा अध्यक्ष पदों पर पार्टी समर्थित उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की। उन्होंने दावा किया कि उनके बूथ देवा पट्टी में यादव समाज के मात्र लगभग 40 वोट होने के बावजूद अन्य समाजों के लोगों ने भी समाजवादी पार्टी का समर्थन किया और विभिन्न चुनावों में पार्टी को जीत दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

पारसनाथ यादव ने कहा कि इतने लंबे राजनीतिक और संगठनात्मक योगदान के बावजूद केवल उन्हें अचानक पद से हटा दिया गया और पूरी पुरानी कमेटी बहाल कर दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस संबंध में न तो कोई चर्चा की गई और न ही उन्हें पूर्व सूचना दी गई। उन्होंने कहा कि संगठन के निर्णय का सम्मान करते हुए वह नवनियुक्त जिलाध्यक्ष जयसिंह यादव तथा सभी नए पदाधिकारियों को शुभकामनाएं देते हैं, लेकिन जिस तरीके से उन्हें पद से हटाया गया, उससे उनके चेहरे से आघात पहुंचाने का भाव साफ़ दिखाई पड़ा।

उन्होंने भावुक अंदाज में कहा, “मैंने हमेशा पार्टी को मजबूत करने का काम किया, फिर भी ऐसा महसूस कराया गया मानो सारी गलती मेरी ही हो। आखिर पारस ही पापी क्यों?”

पूर्व जिलाध्यक्ष के इस बयान के बाद जिले की समाजवादी राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है। राजनीतिक गलियारों में उनके बयान को संगठनात्मक असंतोष और कार्यकर्ताओं की भावनाओं से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि पारसनाथ यादव ने स्पष्ट किया कि वह समाजवादी पार्टी के प्रति पूरी तरह समर्पित हैं और भविष्य में भी पार्टी की मजबूती के लिए कार्य करते रहेंगे। 

नव नियुक्त अध्यक्ष के स्वागत के बारे में पूछने पर पूर्व अध्यक्ष ने बताया कि उनके करीबी रिश्तेदार की तबीयत गंभीर रूप से खराब होने के कारण वह हाइलेट हॉस्पिटल कानपुर में थे जिसके चलते स्वागत समारोह में नहीं पहुंच सके। मंगलवार को पूर्व जिला अध्यक्ष के घर पर मौजूदगी की सूचना पर पारसनाथ से मिलने के लिए सुबह से ही उनके आवास पर पार्टी कार्यकर्ताओं व पदाधिकारीयों का जमावड़ा लगा रहा।

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